कि मैंने प्रीत की पहली तुम्हीं संग डोर थी बांधी!
नहीं गम है कि ठुकराई हमेशा प्यार की पाती
ये क्या कम है कि मेरे हाथ पे राखी नहीं बांधी!!
कैंपस के लॉन में हमने तुम्हें घंटों निहारा था हॉस्टल की छत से आधी रात में तुमको पुकारा था
भले ही प्यार ना था तुमको हमसे एक जर्रा भी
जरा सी तो खुशी होगी, कोई आशिक तुम्हारा था!!
तुम्हारे गम को वाइन से जरा डाइल्यूट करते थे
तुम्हारा नाम अपने खूँ से डेकोरेट करते थे
पता चलने पे अगले दिन, हमें फिर डांटती थी तुम
तुम्ही से प्यार करते थे, तुम्ही को हेट करते थे
जो हो जाती कहीं शादी, तो तुम पीने नहीं देती।
जो नखरे ना उठा पाता, तो तुम सोने नहीं देती।
तुम्हारी किच-किचों से तो तुम्हारी याद है बेहतर..
तुम्हें मेरे पास रखती है, कभी खोने नहीं देती!!
कलाकार कमल
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