जीवन क्षणिक है !!!
अगले पल की किसी को कोई खबर नहीं
फिर भी संघर्ष जारी है
न जाने क्यों प्रकृति ने उत्थान और पतन के इस चक्रव्यूह मे
हम सब को जकड़ रखा है ?
ये जानते हुए भी कि अनंत गगन का लेश मात्र हूं !!
'मंगल' को जीतने की चाह पाले हूं!!
और पते की बात सुनो .............
जीत भी रहा हूं प्रकृति को और ब्रह्मांड को भी!
.............'कौशल' के साथ बैठा ही था दो दिन पहले
पेट मे गैस की शिकायत की थी उसने
आज फोन किया तो ......................
बोला एड्मिट हूं और डायलिसिस पे हूं !!!!!!!!!!!!!!!
किडनी बदलनी होगी ..............
बदल गई तो..... जीवन है वर्ना ....
नदी के उस पार जाना होगा ...............
मंगल के भी आगे .......
अमंगल की ओर !!!!!!!!!
उसे साहसिक,आशावादी शब्दों मे समझाया
प्रेरित किया, जीवन आशा को जीवंत किया
हँसाया भी उसे ............गुदगुदाया भी .............
ज़िंदा रहने का भरोसा ही दिला दिया मैंने .............
पर फोन रखते ही ............
मेरी आंखों का रक्त पिघलने लगा
अश्रु धार फूट पड़ी .............
मैं हत्प्रभ बढ़ा अपनी उसी अलमारी की ओर
जहां मेरी ओल्ड मोंक की बॉटल रखी थी मैंने
पत्नी से छिपाकर।
अभी शराब पी रहा हूं।
कौशल कभी न पीता था ।
न्यू इयर या होली पर भी नहीं !
बड़ी ज़िद के बाद भी एक न सुनता था मेरी।
एक न सुनता है मेरी .............
मेरा अपना तो नहीं.............,
मेरा पड़ोसी ही था कौशल।
पर आज की खबर सुनकर मालूम हुआ कि
मेरा अपना ही था कौशल।
वो जब वापस आएगा तो ज़रूर पिलाऊँगा उसे
दो बूंद ही सही .....अपने साथ
और में भी पीऊँगा उस पुनर्जजीवित आशा के साथ
......................इस अपने के साथ ।।
सुमंगल के साथ, नव मंगल के साथ।।
।
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